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संदेश

Hindi story आप भले तो जग भला

आप भले तो जग भला  एक बार एक व्यक्ति एक गांव में शरण देने के लिए पहुंचता है। वहां जाकर उस गांव के बाहर बने एक चबूतरे पर बैठे हुए कुछ लोगों से पूछता है, "मैं रहने के लिए एक गांव की तलाश कर रहा हूं। यह गांव कैसा है? इसमें रहने वाले लोग कैसे हैं?" तब एक बुजुर्ग व्यक्ति पूछता है कि आप अपना गांव छोड़कर क्यों आए हैं? तब वह व्यक्ति कहता है, "मैं अपना पहले वाला गांव इसलिए छोड़कर आया हूं, क्योंकि उस गांव के सभी लोग बहुत ही चालाक धोखेबाज और दुष्ट थे।" तब वह बुजुर्ग व्यक्ति कहता है, "अरे! तुम यहां से चले जाओ। यह गांव तुम्हारे लायक नहीं है। यहां के सभी लोग बहुत दुष्ट तथा चालाक हैं।" यह सुनकर वह व्यक्ति वहां से चला जाता है। कुछ ही देर बाद एक अन्य व्यक्ति आता है और वह भी वहां बैठे लोगों से पूछता है, "महाशय! कृपया बताइए कि यह गांव कैसा है? मैं कुछ दिन इस गांव में रहना चाहता हूं?" तब बुजुर्ग व्यक्ति उससे भी वही सवाल करता है कि पहले आप यह बताएं कि आप जिस गांव को छोड़कर आए हैं, वहां के लोग कैसे थे? ...

प्रकृति : कल, आज और कल Hindi poem on nature

हरी मखमली चादर ओढ़े, पहले धरती मुसकाती थी। पंछी के मीठे कलरव से,  हर सुबह इठलाती थी। नदियों का निर्मल पावन जल,  जीवन का राग सुनाता था। पेड़ों की शीतल छाँव तले,  हर तन-मन सुख पा जाता था। पर लोभ की अग्नि में मानव ने,  देखो सब कुछ बिसराया है। स्वार्थ की अंधी भाग-दौड़ में, प्रकृति का दामन ठुकराया है।  कटते वन व जलते जंगल,  और बंजर होती धरती माँ। सूख रहे ये जीवन-झरने,  चहुँ ओर घिरा धुआँ-धुआँ। ओजोन की चादर तार-तार हो,  पड़ी-पड़ी कराहती है‌। तेज धधकती सूर्य किरण नित,  चेतावनी देकर जाती है। ‘संभल जाओ हे स्वार्थी मानव,  अब भी थोड़ा समय है बाकी। वर्ना फिर जल्दी बुझ जाएगी, तेरे जीवन की यह बाती। न सँभले गर, अब भी हम तुम,  तो प्रकृति देगी सब सूद समेत। जैसा हम देंगे, वैसा पाएँगे, धरती न रखती टका एक। आज जो दिख रहे बाढ़ बवंडर,  ये तो बस एक झाँकी है। थाम के दिल फिर देखना होगा, क्योंकि, पूरी पिक्चर अभी बाकी है। धरती को और गंगा को ‘माँ’, कहने भर से अब नहीं चलेगा। इनका दामन साफ सफाई,  और हरियाली से भरना होगा। आने वाली पीढ़ी हमको न कोसे,  मिलके...

दशहरा पर कविता (Dusshera par Hindi poem)

अधर्म का नाश करें, धर्म को बचाएँ रावण का पुतला समझाता है हमको  अहंकारी का अंत होता है बहुत बुरा। पकड़ लो धर्म और सत्य के मार्ग को अन्यायी के साथ कभी होना न खड़ा।। रघुनंदन में धैर्य और साहस था अपार, जो आज भी देता है हमें सीख बारंबार। अच्छाई ने बुराई को हराया है हर बार, सत्य की जीत का सदा फैला है प्रकाश ।। आओ इस दशहरा नया संकल्प जगाएं अपने भीतर बैठे रावण को मार गिराएँ। अनुशासन, सच्चाई और सद्गुण अपनाएँ न्याय और करुणा का सदा साथ निभाएँ। श्रीराम ने रावण को मार धर्म था बचाया,  त्याग, से वा, भक्ति का अध्याय था रचाया। दशहरे के संदेश को हम मन से अपनाएँ, अधर्म का नाश करें और धर्म को बचाएँ।।

Hindi motivational story, dil ka ghav (दिल का घाव)

  दिल का घाव बात बहुत पुराने समय की है। जब लोग पैदल ही यात्राएँ किया करते थे। एक बार कुछ लोगों का समूह यात्रा करते समय एक घने जंगल से गुज़र रहा था। तभी सबने एक शेर की आवाज़ सुनी। सब डर के कारण इधर-उधर भागने लगे। शेर बोला, "डरो मत, मैं तो खुद ही संकट में हूँ। मेरे पैर में एक काँटा लगा हुआ है। न मैं चल पा रहा हूँ, न शिकार कर पा रहा हूँ। मैं काँटे से बहुत पीड़ित हूँ। कृपया मेरा काँटा निकाल दें। मेरी सहायता करें।" लेकिन किसी की भी हिम्मत शेर के पास जाने की नहीं हो रही थी। उन्हें लगा कि कहीं यह शेर की चाल न हो। उस समूह में रामदास नाम का एक व्यक्ति भी था। उसे शेर की बात में सच्चाई लगी। उसने लोगों से शेर की सहायता करने के लिए कहा, परंतु कोई भी जोखिम उठाने को तैयार न हुआ। सभी लोग आगे बढ़ गए। परंतु रामदास ने शेर की सहायता करने की ठानी। वह डरते हुए शेर के पास गया। उसने देखा, शेर अपना दाहिना पैर ऊपर की ओर उठाए हुए था‌। उस पैर के पंजे में बहुत बड़ा काँटा चुभा हुआ था और शेर के पंजे से रक्त बह रहा था। काँटे की चुभन से शेर दुख के मारे तड़प रहा था। रामदास ने शेर से कहा, "मैं तुम्हारे पै...

Hindi story

"हे भगवान! आज फिर कपड़ों पर स्याही के छींटे! लगता है, आज भी किसी से झगड़ा करके आया है।" "रोहित! इधर तो आ ज़रा।" मालती ने अपने नौ वर्षीय बेटे को पुकारा।  "हाँ मम्मी, आपने मुझे बुलाया।" "हाँ बेटे, यह बताओ आज किस से झगड़ा हुआ है?" "किसी से भी तो नहीं" रोहित ने कुछ घबराते हुए कहा।  "देख! झूठ मत बोल। सच-सच बता। तेरी कमीज़ पर स्याही किसने फेंकी है।" "वो.……स्या…ही..वो तो मम्मी अनुभव से गलती से गिर गई" हकलाते हुए रोहित ने कहा। "गलती से गिर गई…..मुझसे कुछ भी मत छुपा। मैं सब जानती हूँ कि गलती से गिरी है या फिर अनुभव ने जानबूझकर फेंकी होगी। वैसे भी स्याही के छींटे तेरी कमीज़ में सामने की तरफ़ हैं। यहाँ सामने की तरफ़ भला गलती से स्याही कैसे गिर सकती है। ये तो जानबूझकर छिड़की गई छींटें हैं।" "सच-सच बोल दे, वरना……" रोहित द्वारा अनुभव का बचाव किए जाने पर मालती आग-बबूला हो उठी। "मम्मी! असल में अनुभव मुझसे रंग माँग रहा था। आपने कहा था न कि ये रंग बहुत महँगे हैं, किसी को मत देना। बस, मैंने देने से मना कर दिया ...

छुट्टियों के बाद स्कूल लौटे बच्चों के स्वागत में कविता (नन्हीं कोंपलों का फिर से स्वागत है!)

जैसा कि हम देख रहे हैं कि गरमी की लंबी छुट्टियों के बाद, स्कूल के आँगन में रौनक लौट आई है। आप बच्चों से ही स्कूल का हर कोना आबाद है। आप बच्चों का फिर से स्कूल आना, एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर रहा है।  इस अवसर पर मैं एक कविता प्रस्तुत करने जा रही हूं, जिसका शीर्षक है  - नन्हीं कोंपलों का फिर से स्वागत है! खुशियाँ लिए, बस्ते टाँगे, फिर तुम लौटे प्यारे बच्चो। हंसी तुम्हारी गूँज रही है, विद्या के प्रांगण में अब तो। खाली था हर कोना पहले, सूना था हर गलियारा। अब तुम संग अपने लाए हो, खुशियों का इक उजियारा।। पंख लगाकर सपनों को अब, फिर से तुमको उड़ना है। नई किताबों के पन्नों पर, ज्ञान की सीढ़ी चढ़ना है।। हम शिक्षक भी देख रहे थे, राह तुम्हें पढ़ाने को। नया सवेरा आया है देखो, फिर खुशियाँ बिखराने को।। चलो मिलकर वचन लेते हैं, न छोड़ेंगे साथ परिश्रम का,  अभ्यास, लगन और एकाग्रता ही, लक्ष्य बने अब जीवन का। स्नेह और ज्ञान की गंगा, मिलकर फिर से बहाएँगे।। विद्या के इस मंदिर को, ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। स्वागत है तुम्हारा प्यारे बच्चो, ज्ञान की इस दुनिया में।  खिलते रहो तुम फूल के जै...

अनुच्छेद दादी माँ

मेरी दादी माँ बहुत प्यारी हैं। उनकी उम्र लगभग 65 साल है। उनके बाल सफेद हैं और वे हमेशा एक साड़ी पहनती हैं। उनकी आँखों में बहुत प्यार और ममता है। दादी माँ सुबह जल्दी उठती हैं और पूजा करती हैं। वे हमें कहानियाँ सुनाती हैं और भजन गाती हैं। जब हम स्कूल से आते हैं, तो वे हमें गरमा गरम खाना खिलाती हैं। उन्हें खाना बनाना बहुत पसंद है और वे बहुत स्वादिष्ट पकवान बनाती हैं। दादी माँ हमें अच्छी बातें सिखाती हैं। वे कहती हैं कि हमें हमेशा सच बोलना चाहिए, बड़ों का आदर करना चाहिए और सबकी मदद करनी चाहिए। वे हमें पढ़ाई में भी मदद करती हैं। जब हम कोई गलती करते हैं, तो वे हमें प्यार से समझाती हैं। दादी माँ को बागवानी का भी बहुत शौक है। उन्होंने अपने छोटे से बगीचे में सुंदर फूल और सब्जियाँ लगाई हैं। वे पौधों की देखभाल करती हैं और हमें भी उनके साथ काम करना सिखाती हैं। शाम को हम सब दादी माँ के पास बैठकर बातें करते हैं। वे हमें अपने बचपन की कहानियाँ सुनाती हैं, जो बहुत मजेदार होती हैं। दादी माँ के साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगता है। वे मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और मैं उनसे बहुत प...

मेरी प्यारी दादी Meri pyaari dadi

मेरी दादी  मुझे आज भी याद है वह दिन, जब मेरी दादी माँ मेरे लिए रंग-बिरंगी चूड़ियाँ लाई थीं। मैं तब छोटी थी, शायद कक्षा 2 में। मेरी दादी माँ, जो हमेशा सफेद साड़ी पहनती हैं और जिनके बाल दूध जैसे सफेद हैं, उनकी आँखों में मेरे लिए ढेर सारा प्यार झलकता था। वह दिन मुझे इसलिए खास याद है क्योंकि उस दिन मैं थोड़ी उदास थी। मेरा एक खिलौना टूट गया था और मैं रो रही थी। दादी माँ ने मुझे अपनी गोद में बिठाया और मेरे आँसू पोंछे। उन्होंने मुझे एक कहानी सुनाई, एक बहादुर राजकुमारी की कहानी जो कभी हार नहीं मानती। कहानी सुनते-सुनते मैं कब हँसने लगी, मुझे पता ही नहीं चला। कहानी खत्म होने के बाद, उन्होंने अपनी साड़ी के पल्लू में से वह सुंदर चूड़ियाँ निकालीं। वे इतनी चमकीली थीं कि मेरी आँखें चौंधिया गईं। उन्होंने कहा, "मेरी प्यारी बिटिया, यह चूड़ियाँ तुम्हारी उदासी को दूर भगा देंगी और तुम्हें हमेशा खुश रखेंगी।" मैंने खुशी-खुशी चूड़ियाँ पहन लीं और अपनी टूटी हुई खिलौने की उदासी भूल गई। दादी माँ हमेशा ऐसे ही करती हैं। जब भी मैं दुखी होती हूँ, या पढ़ाई में कोई मुश्किल आती है, तो वह मुझे हिम्म...

चपड़ी मौसी (मज़ेदार कहानी)

चपड़ी मौसी  बिल्ली चूहे को क्यों ना पसंद करती है और शेर को बिल्ली ज़रा भी पसंद नहीं, ऐसा क्यों जानिए इस कहानी के ज़रिए बिल्ली चूहे को पसंद नहीं करती है और शेर बिल्ली को  ज़रा भी पसंद नहीं करता। ऐसा क्यों जानिए इस कहानी के ज़रिए बिल्ली को शेर की मौसी कहा जाता है। लेकिन शेर को तो बिल्ली ज़रा-भी पसंद नहीं आती। आख़िर क्यों? और ऐसा भी क्या है कि बिल्ली जैसी चालाक प्राणी नन्हे चूहे के पीछे पड़ी रहती है? प्रस्तुत है इसी मुद्दे को और रोचक बनाती जंगल की एक कहानी। बहुत पुरानी बात है। जंगल का राजा शेर बिल्ली पर बहुत भरोसा करता था। बिल्ली चपड़ी मौसी के नाम से मशहूर थी। चपड़ी मौसी शेर की सलाहकार भी थी। शेर के दरबार में चूंचूं चूहा भी था। वह शेर का मंत्री था। चूंचूं बुद्धिमान था। संकट में चूंचूं ही शेर के काम आता। चपड़ी मौसी बहानेबाज़ थी। बीमारी का बहाना लेती। एक दिन शेर ने बिल्ली से कहा, ‘चपड़ी मौसी। जब-जब हम मुसीबत में होते हैं, चूहा ही हमें उबार लेता है।’ यह सुनकर बिल्ली जल-भुन गई। मौक़ा देखकर बिल्ली चूहे से बोली, ‘पिद्दी भर के छोकरे। कसम खाती हूं।’ एक दिन तुझे ज़रूर हराऊंगी।’ चूहा मुस्कराया। प्य...

सोलह श्रृंगार कौन-कौन से हैं?

            सोलह श्रृंगार  सोलह श्रृंगार का अर्थ है-सोलह प्रकार के आभूषण, जो शरीर के अलग-अलग अंगों पर पहने जाते हैं। करवाचौथ आदि विशेष अवसरों पर महिलाएँ या नववधुएँ-ये सोलह श्रृंगार करती हैं।  सबसे पहले हल्दी-चंदन-बेसन का लेप या उबटन लगाकर महिलाएँ स्नान करती हैं। उसके पश्चात् ये सोलह श्रृंगार करती हैं। पहले स्वर्ण आभूषण या कहीं-कहीं फूलों के आभूषण बनाकर पहने जाते थे, परंतु आजकल हीरे, मोती तथा चाँदी आदि के आभूषण भी पहने जाते हैं।  करवाचौथ पर सुहागिन महिलाएँ व्रत रखती हैं। करवा माता की पूजा करती हैं और उनसे अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस अवसर पर महिलाएँ सोलह श्रृंगार करती हैं। तो चलिए, आज हम जानते हैं कि सोलह श्रृंगार कौन-कौन से हैं- (१) मज्जन (धोना या स्नान करना) (२) चीर (कपड़े) (३) हार (गले का हार)  (४) तिलक (माथे पर लगाने वाला टीका) (५) अंजन (काजल) (६) कुंडल (कान के आभूषण) (७) नासामुक्ता (नाक का आभूषण) (८) केशविन्यास (बालों का सजाना) (९) चोली (कंचुक) (ऊपर का कपड़ा) (१०) नूपुर (पायल) (११) अंगराग (सुगंध) (१२) कंकण (...

बंदर मगरमच्छ की कहानी (दोस्ती वही, कहानी नई)

दोस्तो, आपने यह कहानी तो सुनी होगी जिसमें एक बंदर और एक मगरमच्छ की आपस में बहुत दोस्ती होती है बंदर मगरमच्छ को प्रतिदिन मीठे जामुन लाकर देता था।  एक दिन मगरमच्छ ने जामुन अपनी पत्नी को खिलाए। पत्नी ने अपने जीवन में पहली बार इतने मीठे जामुन खाए थे। उसने कहा तुम्हारा दोस्त प्रतिदिन इतने मीठे जामुन खाता है, उसका कलेजा भी कितना मीठा होगा। मुझे तो उसका कलेजा खाना है। मगर के बहुत समझाने पर भी वह नहीं मानी। आखिरकार मगरमच्छ को पत्नी हठ के आगे हार माननी पड़ी। अगले दिन वह नदी के किनारे पहुँचा तो वहाँ बंदर मीठे जामुन लेकर उसका इंतजार कर रहा था।  मगरमच्छ ने कहा, "बंदर भाई तुम्हारी भाभी यानी मेरी पत्नी तुमसे मिलना चाहती है।" बंदर ने कहा, "मुझे तो तैरना भी नहीं आता, भला मैं कैसे जा पाऊँगा।" मगरमच्छ ने कहा, "कोई बात नहीं, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ। मैं तुम्हें ले जाऊँगा।"  बंदर मगरमच्छ की बातों में आ गया और वह उसके घर जाने के लिए उसकी पीठ पर बैठ गया। किंतु मगरमच्छ दिल का भोला था। उसने सोचा अब तो बंदर मरने ही वाला है, तो इसे सत्य बता ही देना चाहिए। उसने कहा, "बंदर भाई! ...

सास-बहू का मोबाइल महायुद्ध (लोक-शैली में मजेदार गीत)

 सास-बहू का मोबाइल महायुद्ध (लोक-शैली में) अटरिया पे बैठी सासू बोली घमक के, "बहू दिन भर मोबाइल चिपकाए है चमक के। ना चूल्हा ना चौका, ना बर्तन ना बासन, बस फोनवा में घुसी रही जैसे हो कोऊ साजन!" बहू बोली, "सासू जी, जमाना है डिजीटल, अब रोटियाँ भी सीखत हैं यूट्यूब से, ये है नया चलन। तू व्हाट्सएप में भेजती फर्जी नुस्खा, हम इंस्टा पे बनाइत हैं छोले भटूरा मसाले वाला चखा!" सास बोली, "बेटी अब ना दे ज्ञान, हम तो देखीं हैं तू टिकटॉक में बन गईं जान। लिपस्टिक लगा के, चूड़ी खनकाई के, दिन भर नाचै मोबाइल धर धर के।" बहू हँस के बोली, "सासू जी अब सुनो, आप भी तो टीवी के सामने बैठी बिन रुको। 'झांसी की रानी' छोड़, देखत रहो ‘सास बहू का झगड़ा’, फिर कहो हमसे, 'बहू, तू घर का कर धंधा'!" इधर बेटा खेत से लौटा थक हार के, देखा दोनों लड़ रहीं मोबाइल ले कार के। बोला, “हे भगवान! ना मैं सुदामा ना तू कृष्णा, फोन के चक्कर में बना दिए मुझे विष्णु का अवतार।” अब सासू को दे दी एक पुराना स्मार्टफोन, बहू को मिल गया नया ब्रांड वाला iPhone। दोनों बैठीं कोने में, चैट करें नैन लड...

मोबाइल महिमा Hindi poem

मोबाइल महिमा सुबह-सुबह आँखें खुलते ही, मोबाइल को हम पाते हैं,  बिना ब्रश किए पहले, नोटिफिकेशन चेक कर जाते हैं। बिस्तर में ही फेसबुक, व्हाट्सएप का दौर चलता है,  चाय ठंडी हो जाए चाहे, पर स्क्रीन से प्यार पलता है। नाश्ते की टेबल पर भी, मोबाइल संग निवाला है,  घरवाले बातें करें तो, 'एक मिनट' का हवाला है। रास्ते में चलते-चलते, मैसेज टाइप किए जाते हैं,  खंभे से टकरा जाएँ पर, इससे दूर न हो पाते हैं। बॉस ऑफिस में लेते मीटिंग, हम तो चैटिंग में व्यस्त हैं,  वो करते मार्केटिंग की प्लानिंग, पर हम इंस्ट्रा में रत हैं। रात को सोने से पहले, मोबाइल का आलिंगन है,  बिना इसके जीवन जैसे, सूना-सूना घर-आँगन है। हे मोबाइल! तेरा जादू, सब जग पर ऐसा छाया है,  बिना तेरे जीवन जैसे, बिना नमक का खाना है। इस मोबाइल के फेर में, नौकरी पर बन आई है, बॉस का 'टास्क' भूलकर, रील्स में आँख गड़ाई है। मोबाइल के चक्रव्यूह ने, अलग ही दुनिया बसाई है,  सारा जगत अब मुट्ठी में है, पर दिल में तन्हाई है।

सास-बहू की डिजिटली नोंक-झोंक (हास्य क्षणिकाएँ)

1. बहू बोली सासू माँ, अब तो मोबाइल रख दो हाथ, रोटियाँ जल गईं इधर, आप थीं स्नैपचैट के साथ। सासू बोली – बहू! रील बना रही थी नई रसोई की, जल गई रोटी, हाय! अब मिलेगी लाइक बस सौ-पचास। 2. सास कहे – बहू!  तेरी अँखियाँ तो हैं बड़ी ही नीली, अरे! ये तो है फिल्टर की करामात, बहू हँसकर बोली। सासू माँ, अब तो डिजिटल ज़माने का ही सब खेला है, ब्यूटी पार्लर की जरूरत नहीं, इंस्टा ने रूप को बदला है। 3. बहू कहे – सासू माँ! घर की बातें अब कम किया करो, व्हाट्सएप पर मोहल्ले को न रोज़ अपडेट दिया करो। सास बोली – पगली, ये मेरी सोसायटी की फीलिंग है, जहाँ स्टेटस न बदला जाए, वहाँ बोरिंग सी लिविंग है! 4. मोबाइल स्क्रीन का लॉक हो, या वाई-फाई का पासवर्ड, बस इनके ही निर्माण में, दीखे बहू का मास्टर वर्क। लाइक्स और व्यूज बढ़ाने में, हो रही होड़ा-होड़ी, फॉलोवर्स बढ़ाने में व्यस्त है, अब सास-बहू की जोड़ी।

रिश्ता अनमोल bhai bahan par sundar si poem

"रिश्ता अनमोल" तू जब हँसे, तो खिल जाए जीवन, तेरे बिना लगे सूना सब घर-आँगन। झगड़े भी तुझसे, मनुहार भी तुझसे है, गुस्सा भी तुझसे, त्योहार भी तुझसे है। कभी तू रुला दे, कभी तू हँसा दे, छोटे-छोटे लम्हे तू यादें बना दे। राखी की डोर में बाँधा है अहसास,  भैया, हर जनम में मिले तेरा साथ।  जब भी कोई डर सताए मुझे, तेरी आवाज़ हिम्मत दिलाए मुझे। तू है तो सब कुछ मेरे पास है, तेरे बिना अधूरी-सी हर आस है। न है कोई शर्त, न है कीमत, न दाम, भरोसा, विश्वास है इस रिश्ते की जान। यूँ ही बनी रहे हमारे संबंधों में सुबास, भैया, हमारा रिश्ता है सबसे ही खास।

नेता जी की लीला अपरंपार (हास्य-व्यंग्य कविता)

नेता जी की लीला अपरंपार (हास्य-व्यंग्य कविता) नेता जी आए गाँव में, मच गया बड़ा धमाल, कहने लगे - "अब बदलूँगा मैं देश-गाँव का हाल।" झाड़ू लिए हाथ में बोले - "मैं हूँ सेवा का पुजारी," भीड़ बोली - "पहले तो थे घोटालों के अधिकारी!" हर गली में पोस्टर उनके, हर नुक्कड़ पर नाम, अब तो बच्चे भी कहने लगे – "नेता जी को प्रणाम!" मंच से बोले - "मैं गरीबों का बेटा हूँ सच्चा," और मंच के नीचे बिरयानी का डब्बा था कच्चा। बिजली, पानी, सड़क दिलाऊँ, रोज़ दिल से कहें, लेकिन खुद जनरेटर लाते, जब भाषण में रहें। गाँव में दिखे बस एक दिन, जब चुनावी मौसम आया, फिर पाँच साल तलक किसी ने नेता जी को न पाया। बोले थे – "हर हाथ को दूँगा काम मैं दोगुना," हुआ ये कि बाकी आधा गाँव भी हो गया काम बिना। नेता जी की लीला देखो, वादों का पुलिंदा भारी, हर झूठ को सच बना दें, वाकपटुता से है इनकी यारी! स्वार्थ की आग पर हाथ सेंकते, मचाकर ये बवाल।  अगलें-बगलें झाँकते, जब जनता पूछे कोई सवाल। गाँव वाले भी समझ गए अब, नेताजी की हर चाल, ऐसे नेता से तो बिन नेता भले, मन में कर ...

चंदन तेल (Sandalwood Oil) के फायदे

चंदन तेल (Sandalwood Oil) के फायदे   चंदन तेल के बहुत सारे फायदे हैं। खासकर आयुर्वेद में इसका उपयोग त्वचा, मन और शरीर को शांत करने के लिए किया जाता है। यहाँ कुछ मुख्य लाभ दिए गए हैं:- 1. त्वचा के लिए फायदेमंद • मुहांसों और दाग-धब्बों को कम करता है • त्वचा को नमी और ठंडक प्रदान करता है • रिंकल्स और झुर्रियों को कम करने में              सहायक 2. तनाव और मानसिक शांति में मददगार • चंदन तेल की खुशबू तनाव कम करती है। • ध्यान और मेडिटेशन के समय उपयोग             करने से एकाग्रता बढ़ती है। 3. सूजन और जलन में राहत • इसके एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन को कम       करने में मदद करते हैं। • जलन या कीड़े के काटने पर राहत देता है। 4. एंटीसेप्टिक गुण • चोट या कट पर लगाने से संक्रमण नहीं           होता। • फंगल संक्रमण में भी उपयोगी। 5. बालों के लिए लाभकारी • स्कैल्प को ठंडक देता है। • डैंड्रफ को कम करने में सहायक। चंदन तेल के कुछ घरेलू उपयोग  यहाँ चंदन तेल के कुछ घरे...

गीत: जा री बिटिया, जीवन पथ चलना

गीत: जा री बिटिया, जीवन पथ चलना (धुन: लोकगीत या भावगीत की शैली में) इस गीत में एक मां अपनी बेटी को विदा करते समय अपने मन के भावों को व्यक्त कर रही है- (अंतरा 1) जा री बिटिया, जीवन पथ चलना, मां के आंचल की छांव छोड़ चलना। तेरे नर्म पाँवों में हों कांटे कई, पर तू हिम्मत से हर राह चलना। जा री बिटिया, जीवन पथ चलना... (अंतरा 2) घर की देहरी अब तू पार करेगी, नई दुनिया से पहचान करेगी। पर तू कभी संस्कार न भूलना, हर रिश्ता सच्चे मन से निभाना। जा री बिटिया, जीवन पथ चलना... (अंतरा 3) बचपन की बातें, वो तेरी हँसी, तेरी हर लोरी अब याद आएगी। तेरे बिना सूना सा घर लग रहा, पर तेरा साजन घर आबाद रहे। जा री बिटिया, जीवन पथ चलना... (अंतरा 4) जब भी लगे तू थक सी गई है, मां की दुआ तेरे संग कहीं है। अपनेपन से तू दीप जलाना, हर अंधेरे को उजियारा बनाना। जा री बिटिया, जीवन पथ चलना...

26 जनवरी का पर्व, लाया नई सौगात (देशभक्ति कविता)

                      गणतंत्र दिवस पर कविता वंदन है उस धरा को, जो भारत माँ कहलाती, हर कोने में जिसके, खुशहाली मुस्काती। 26 जनवरी का पर्व, लाया नई सौगात, गणतंत्र का यह उत्सव, है हम सबका साथ। संविधान की शक्ति से, चल रहा देश महान, सपनों का भारत बने, यही है अरमान। बलिदानों की धरती पर, लहराए तिरंगा प्यारा, हर दिल में हो बस एक ही नारा – "भारत माता की जयकारा!" वीरों के बलिदान से, सींची आज़ादी की बगिया, हर हाथ में हो तिरंगा, हर मन में हो सुख-शांति की दुनिया। चलो मिलकर कदम बढ़ाएं, सपनों का भारत सजाएं, गणतंत्र के इस पावन दिन, हर दिल को हम जगाएं।

श्रीकृष्ण: प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण संरक्षक (हिंदी लेख)

श्रीकृष्ण: प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण संरक्षक श्रीकृष्ण केवल एक महान योद्धा, राजनेता और दार्शनिक ही नहीं थे, बल्कि वे प्रकृति प्रेमी भी थे। उनके जीवन के अनेक प्रसंगों में प्रकृति के प्रति उनका गहरा लगाव दिखाई देता है। वे नंदगांव और वृंदावन की हरी-भरी वादियों में गायों के साथ विचरण करते थे, यमुना के निर्मल जल में क्रीड़ा करते थे और कुंज-वनों में बांसुरी की मधुर धुन से प्रकृति को संगीतमय बना देते थे। श्रीकृष्ण का जीवन हमें पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम की सीख देता है। श्रीकृष्ण और प्रकृति का गहरा संबंध 1. गोकुल और वृंदावन की हरियाली श्रीकृष्ण का बाल्यकाल गोकुल और वृंदावन की हरी-भरी भूमि में बीता। वे अपने ग्वाल-बाल मित्रों के साथ गाएं चराने जाते थे। उनके जीवन का यह पक्ष हमें पशुपालन, जैव विविधता और प्रकृति संरक्षण की महत्ता समझाता है। 2. यमुना नदी से प्रेम श्रीकृष्ण का यमुना नदी से गहरा संबंध था। उन्होंने कालिय नाग का वध करके यमुना के जल को शुद्ध किया, जिससे जीव-जंतुओं को स्वच्छ जल प्राप्त हुआ। यह घटना हमें जल संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति का संदेश देती है। 3. गोवर्धन पर्वत की...